कुछ अपने बारे में

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बडी छोटी-सी टोली है हमारी. लेकिन इस टोली में आपको विकासपरक मुद्दों के चिन्तकों से भेंट हो जाएगी, शोधकर्ताओं और मीडियाकर्मियों से भी. अगर आपका सवाल यह है कि साहब यह टोली करती क्या है तो हमारा जवाब होगा कि दरअसल हमलोग एक भंडारघर बना रहे हैं भारत के गंवई इलाकों के संकट से जुड़ी सूचनाओं का और हमारा मकसद हंगामा खड़ा करना नहीं बल्कि यह सूरत बदलनी चाहिए की तर्ज पर सार्थक बहसों की जमीन तैयार करना है. इनक्लूसिव मीडिया फॉर चेंज की शुरुआत फोर्ड फाऊंडेशन की अनुदान-राशि से हुई और बाद में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की मदद से हमारा सफर जारी है. वर्ष 2009 में इस परियोजना की शुरुआत विकासशील समाज अध्ययन पीठ यानी सेंटर फॉर स्टडी ऑव डेवलपिंग सोसायटीज (CSDS) से हुई थी और अब यह परियोजना कॉमन कॉज (www.commoncause.in) का हिस्सा है. हमारा मुख्य काम हाशिए पर रह रहे लोगों से जुड़ी सूचनाओं और विचारों का भंडारघर बनाना है. हम लोग एक वेबसाईट चलाते हैं जिसका नाम है www.im4change.org और इस वेब-साईट को तैयार किया गया है यह सोचकर कि जो कभी मीडियाकर्मी, नीति-निर्माता और विकासपरक मुद्दों पर चिन्तन करने वाले लोग भारत के बहुमुखी ग्रामीण संकट के बारे में हाथ के हाथ कुछ सूचना खोजना चाहें या फिर समझ बनाना चाहें तो यह वेब-साईट उनकी दोस्त साबित हो सके. हमारी टोली ग्रामीण-संकट पर केंद्रित मीडिया कवरेज की ऑडिट के लिए मीडिया-रिसर्च भी करती है और गाहे-ब-गाहे हमलोग रिपोर्टरों और नागरिक-समूह के कार्यकर्ताओं के लिए कार्यशाला का भी आयोजन करते हैं.

हमारी टोली के सदस्य यानी विपुल मुदगल (vipulmudgal@gmail.com), शंभु घटक (shambhucommon@gmail.com) और मनदीप सिंह विचारधारा के तईं कट्टर कत्तई नहीं और जो कोई शुभचिन्तक अपनी शुभचिन्ता में या फिर हमारे काम के बारे में आलोचना करता है या कोई सुझाव देता है तो इसका हार्दिक स्वागत है.
 

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