पलायन (माइग्रेशन)

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What's Inside

 

COVID-19 के कारण पनपे आर्थिक संकट को पलायन के नजरिए से देखने पर समझ आता है कि इसका प्रभाव कितना लंबा, गहरा और व्यापक हो सकता है. लॉकडाउन, आवाजाही पर रोक, और सोशल डिस्टेंसिंग ने वैश्विक आर्थिक गतिविधियों को एक जड़ बना दिया है.

प्रवासी मजदूरों के बलबूते उड़ान भरने वाले मेजबान देश, स्वास्थ्य और कृषि जैसे कई क्षेत्रों में अतिरिक्त चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और प्रवासियों के लिए इस रोग के खतरे के अलावा रोजगार, मजदूरी, और स्वास्थ्य बीमा कवरेज के संभावित नुकसान मुंह बाए खड़े हैं. 

'COVID-19 क्राइसिस थ्रू ए माइग्रेशन लेंस' नामक माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट डाक्यूमेंट इस बात का पूर्वाभास प्रदान करता है कि 2020 और 2021 में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक पलायन और प्रेषण से अर्थव्यवस्था के वैश्विक रुझान कैसे प्रभावित होने वाले हैं. इस तथ्य पर गौर करते हुए कि प्रवासी शहरी आर्थिक केंद्रों यानी शहरों में ठूसें जाते हैं, और बहुत बुरी स्थिति में अपनी गुजर-बसर करते हैं, आज वे भी कोरोनोवायरस द्वारा संक्रमण की चपेट में हैं, इसलिए उन्हें भी कोरोनावायरस को हराने के लिए हो रहे प्रयासों में शामिल करने की आवश्यकता है. प्रवासियों की कमाई कई देशों में गरीब परिवारों को आर्थिक जीवन-यापन के लिए संजीवनी का काम करती है. अगर प्रवासियों की कमाई में कमी आती है तो निश्चित ही गरीबी बढ़ सकती है और उनके परिवारों की जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच कम हो सकती है. इस संकट में प्रवासियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार बढ़ सकता है, जिसकी वजह से इस तरह की प्रथाओं के खिलाफ अधिक सतर्कता की जरूरत है.

यह पोलिसी ब्रीफ मुख्यत रूप से अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों पर केंद्रित है, लेकिन सरकारों को आंतरिक प्रवासियों की दुर्दशा को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. आंतरिक पलायन की संख्या अंतर्राष्ट्रीय पलायन से लगभग ढाई गुना ज्यादा है. लॉकडाउन, रोजगार छीनने और सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से भारत और लैटिन अमेरिका के कई देशों में बड़े पैमाने पर आंतरिक प्रवासियों की घर वापसी की एक अराजक और दर्दनाक प्रक्रिया को पोषित किया है. इस प्रकार, COVID-19 रोकथाम उपायों की वजह से भी यह महामारी फैल सकती है. विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहे इन प्रवासियों को सरकारों द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं और कैश ट्रांसफर और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल किए जाने की जरूरत है और उन्हें भेदभाव से बचाने के लिए उनकी समस्याओं का समाधान करने की आवश्यकता है.

ग्लोबल नॉलेज पार्टनरशिप ऑन माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट (KNOMAD) द्वारा जारी माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट डाक्यूमेंट नंबर 32, 'COVID-19 क्राइसिस थ्रू ए माइग्रेशन लेंस' (22 अप्रैल, 2020 को जारी), नामक रिपोर्ट, जो विश्व बैंक, यूरोपीय आयोग, जर्मनी के संघीय आर्थिक सहयोग और विकास मंत्रालय (BMZ), और स्विस एजेंसी फॉर डेवलपमेंट एंड कोऑपरेशन (SDC) द्वारा समर्थित है, के प्रमुख निष्कर्ष इस प्रकार हैं(एक्सेस करने के लिए कृपया यहां क्लिक करें):

• भारत में, 2020 में प्रवासियों द्वारा भेजी जाने वाली कमाई में लगभग 23 प्रतिशत, $ 64 बिलियन तक कम होने का अनुमान है – जोकि, 2019 में 5.5 प्रतिशत की वृद्धि और 83 बिलियन डॉलर के साथ एकदम विपरित थी.

• यात्रा प्रतिबंध पर रोक लगने से पहले ही, संकट के शुरुआती चरणों में गल्फ कॉर्पोरेशन काउंसिल (जीसीसी) यानी खाड़ी के देशों में काम करने वाले बहुतेरे अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी, विशेष रूप से देशों से, भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों के रहने वाले प्रवासी वापस लौट आए.

• मुख्यत भारत से, पिछले सालों की तुलना में साल 2019 में निम्न-कुशल प्रवासियों की संख्या में वृद्धि हुई थी, लेकिन महामारी और तेल की कीमतों में गिरावट के कारण जीसीसी देशों में आए संकट की वजह से, साल 2020 में गिरावट की संभावना है. दूसरे मुल्कों में जाकर काम करने के लिए अनिवार्य मंजूरी की मांग करने वाले कम-कुशल प्रवासियों की संख्या 2019 में 8 प्रतिशत बढ़कर 3,68,048 (विदेश मंत्रालय, भारत) हो गई.

• भारत में लॉकडाउन ने देश के लगभग 4 करोड़ आंतरिक प्रवासियों के एक बड़े हिस्से की आजीविका को प्रभावित किया है. कुछ दिनों के ही अंतराल में लगभग 50,000-60,000 प्रवासी शहरी केंद्रों से ग्रामीण क्षेत्रों में चले गए. सरकार ने इन प्रवासियों को आश्रय प्रदान करने के लिए बुनियादी प्रावधानों के साथ मेजबान शहरों, जिलों और गृह जिलों में शिविर लगाए.

• लॉकडाउन, रोजगार छीनने और सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से भारत और लैटिन अमेरिका के कई देशों में बड़े पैमाने पर आंतरिक प्रवासियों की घर वापसी की एक अराजक और दर्दनाक प्रक्रिया को पोषित किया है. इस प्रकार, COVID-19 रोकथाम उपायों की वजह से भी यह महामारी फैल सकती है. विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहे इन प्रवासियों को सरकारों द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं और कैश ट्रांसफर और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल किए जाने की जरूरत है और उन्हें भेदभाव से बचाने के लिए उनकी समस्याओं का समाधान करने की आवश्यकता है.

• मेजबान देश में आर्थिक संकट के दौरान मूल निवासी श्रमिकों की तुलना में प्रवासी श्रमिकों को रोजगार और मजदूरी का अधिक नुकसान भुगतना पड़ता है. लेबर कैंप और डॉरमैट्री बंद होने के कारण प्रवासी श्रमिकों के बीच छूत का खतरा भी बढ़ सकता है. परिवहन सेवाओं के निलंबन के कारण कई प्रवासी फंसे हुए हैं.

• हालांकि कमाई भेजने के लिए डिजिटल भुगतान उपकरणों का उपयोग बढ़ रहा है, अक्सर गरीब और अनियमित प्रवासियों की ऑनलाइन सेवाओं तक पहुंच कम होती है. उन्हें बैंकों, भुगतान कार्ड या मोबाइल मनी के माध्यम से मेहनताना मिलने और उसे भेजने की आवश्यकता होती है. ऑनलाइन लेनदेन (जैसे कैशबेड सर्विसेस) में धोखाधड़ी और वित्तीय अपराध के खिलाफ सतर्कता बरतने के लिए प्रेषण सेवा प्रदाताओं की आवश्यकता होती है, जो एंटीमनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण (एएमएल / सीएफटी) के नियमों का पालन करते हैं. हालांकि, इस लॉकडाउन में इस तरह की सेवाओं में भी स्टाफ की कमी के बीच अब ये मुश्किल हो गया है.

• अंतर्राष्ट्रीय प्रवासियों की तुलना में आंतरिक प्रवासियों की संख्या लगभग ढाई गुना है. चीन और भारत, प्रत्येक में 10 करोड़ से अधिक आंतरिक प्रवासी हैं. आबादी के गरीब वर्गों के लिए, विशेष रूप से अविकसित ग्रामीण क्षेत्रों से, शहरी आर्थिक केंद्रों में पलायन करना गरीबी और बेरोजगारी से मुक्ति प्रदान करता है. आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों की तुलना में कम कमाने वाले इन प्रवासियों की कमाई, इनके परिवारों के लिए एक जीवन रेखा और जीवन की डोर को बचाने का काम करती है.

• COVID-19 के प्रकोप ने कई आंतरिक प्रवासी कामगारों को गंभीर परिस्थितियों में धकेल दिया है. बहुतेरे अपनी (ज्यादातर अनौपचारिक) नौकरियां गंवा चुके हैं और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं और आवाजाही पर प्रतिबंध के कारण घर लौटने में असमर्थ हैं. अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले और दमघोटू झुग्गियों में रहने वाले अधिकांश प्रवासी मजदूरों की यही सच्चाई है.

• भारत में, सरकार ने इन प्रवासियों को आश्रय प्रदान करने के लिए बुनियादी प्रावधानों के साथ मेजबान शहरों, जिलों और गृह जिलों में शिविर लगाए हैं. कुछ देश आंतरिक प्रवासियों और वापस लौट चुके प्रवासी श्रमिकों के लिए विशिष्ट आवंटन के साथ प्रभावित और कमजोर समूहों को नकद सहायता प्रदान कर रहे हैं.



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