भोजन का अधिकार

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 खास बात

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खाद्य सुरक्षा विधेयक में कहा गया है कि देश के ग्रामीण क्षेत्र के 75 फीसदी और शहरी क्षेत्र के 50 फीसदी लोगों को खाद्य सुरक्षा प्रदान की जाएगी। इस आबादी का वर्गीकरण दो कोटिय़ों- प्राथमिक(priority) और सामान्य(general)- के रुप में किया जाएगा।  ग्रामीण क्षेत्र से 46 फीसदी लोगों को प्राथमिक वर्ग में रखा जाएगा जबकि शहरी क्षेत्र से 28 फीसदी लोगों को। बाकी जन दोनों ही क्षेत्रों में सामान्य वर्ग में माने जायेंगे।



विधेयक के मसौदे के अनुसार बीपीएल परिवारों को अंत्योदय अन्य योजना के अंतर्गत मिल रहा 35 किलो अनाज प्रति माह अब घटकर 25 किलो अनाज प्रति माह रह जाएगा यानी आहार सुरक्षा अधिनियम का मसौदे अंत्योदय अन्न योजना की जगह अब 25 किलो अनाज अनुदानित मूल्य पर प्रस्तावित कर रहा है।

·राष्ट्रीय आहार सुरक्षा अधिनियम का एक वैकल्पिक मसौदा प्रोफेसर ज्यां द्रेज की अगुवाई में एक दल ने तैयार किया है। इसे 24 जून 2009 को जारी किया गया। इस मसौदे में कहा गया है कि मौजूदा वक्त में चल रहे 8 भोजन और पोषण से जुड़े कार्यक्रमों के मिल रहे फायदों से गरीब परिवारों को आहार सुरक्षा अधिनियम के बहना  वंचित ना किया जाय बल्कि उन्हें इसके साथ समग्र रुप दिया जाय।

·  ओड़ीसा , मध्यप्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, राजस्थान में 1890 किलो कैलोरी से कम पोषण इकाई का उपभोग कर रहे लोगों की तादाद पिछले पाँच सालों में बढ़ी है। *

· एक तथ्य यह भी है कि आठ राज्यों- आंध्रप्रदेश, बिहार , गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश और राजस्थान में प्रजनन-सक्षम आयु वर्ग की महिलाओं में एनीमिया की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। *

· ग्रामीण भारत में आहार असुरक्षा की माप के लिए तैयार किए गए एक पैमाने पर झारखंड और छ्तीसगढ़ सबसे संगीन किस्म की आहार असुरक्षा से जूझता राज्य बताया गया है। इसके बाद मध्य प्रदेश, बिहार और गुजरात का नंबर है। *

·  ग्रामीण इलाकों में १८.७ फीसदी परिवार और शहरी इलाकों में ३३.१ फीसदी परिवारों के पास सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत जारी किया जाने वाला कोई भी कार्ड नहीं है।**

·  ८१ फीसदी ग्रामीण परिवारों और ६७ फीसदी शहरी परिवारों के पास राशन कार्ड है। बीपीएल कार्ड २६.५ फीसदी ग्रामीण परिवारों और १०.५ फीसदी शहरी परिवारों को हासिल है।

·   बीपीएल कार्ड २६.५ फीसदी ग्रामीण परिवारों और १०.५ फीसदी शहरी परिवारों को हासिल है।**

·  अंत्योदय योजना के तहत जारी किए जाने वाले कार्ड ग्रामीण क्षेत्रों में महज 3 फीसदी और शहरी क्षेत्र में महज 1 फीसदी गरीब परिवारों के पास हैं। **

* एम एस स्वामीनाथन रिसर्च फाऊंडेशन और वर्ल्ड फूड प्रोग्राम द्वारा जारी रिपोर्ट ऑन द स्टेट ऑव फूड इन्स्क्योरिटी इन इंडिया(2009) से ।

**राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण द्वारा 61 वें दौर की गणना के बाद जारी सांख्यिकी से।

http://www.righttofoodindia.org/data/rtf_act_essential_demands_of_the_rtf_campaign%20_220709.pdf


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