मानव  विकास सूचकांक

मानव विकास सूचकांक

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 खास बात

• 2018 में, 189 देशों और संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त क्षेत्रों में भारत मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) में 129वें पायदान पर (एचडीआई वेल्यू 0.647) था, जबकि चीन 85वें (एचडीआई वेल्यू 0.758), श्रीलंका 71वें (एचडीआई वेल्यू 0.780), भूटान 134वें  (एचडीआई वेल्यू 0.617), बांग्लादेश 135 वें (एचडीआई वेल्यू 0.614) और पाकिस्तान 152 वें पायदान (एचडीआई वेल्यू 0.560) पर था.

• 1990 और 2018 के बीच, औसत वार्षिक मानव सूचकांक के मूल्यांक में (तर्कयुक्त संकेतक, कार्यप्रणाली और समय-श्रृंखला डेटा के आधार पर) भारत की 1.46 प्रतिशत, चीन की 1.48 प्रतिशत, बांग्लादेश की 1.65 प्रतिशत, पाकिस्तान की 1.17 प्रतिशत और श्रीलंका की 0.90 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई थी.

• 2010-18 की समयावधि में भारत में अपने 63.5 प्रतिशत पुरुष समकक्षों की तुलना में सिर्फ 39.0 प्रतिशत वयस्क महिलाएं (25 वर्ष और उससे अधिक) ही किसी भी तरह की माध्यमिक शिक्षा हासिल कर पाई हैं.

• 2010-2017 के दौरान, भारत का जीनी(Gini) गुणांक (आय असमानता का आधिकारिक मापतंत्र, जो शून्य और 100 के बीच भिन्न होता है, 0 पूर्ण समानता दर्शाती है और 100 पूर्ण असमानता की ओर इशारा करती है) 35.7 था, जबकि चीन का 38.6 था, बांग्लादेश का 32.4, पाकिस्तान का 33.5, श्रीलंका का 39.8 और भूटान का 37.4 था.

• भारत का एचडीआई इंडेक्स(मानव विकास सूचकांक या ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स)  0.609 है यानी कुल 188  देशों के बीच भारत का स्थान इस पैमाने पर  130 वां है।*

• भारत का एचपीआई-1 (ह्यूमन पॉवर्टी इंडेक्स) मान  31.3 है , यानी कुल 108   देशों के बीच भारत का स्थान इस पैमाने पर 62 वां है।*

• मानव विकास सूचकांक के मामले में देश के प्रांतों में केरल सबसे आगे(0.638) है इसके बाद पंजाब (0.537), तमिलनाडु (0.531), महाराष्ट्र (0.523) और हरियाणा (0.509) का नंबर आता है( साल2001 के लिए) **

• मानव विकास सूचकांक के मामले में सबसे पिछड़ा राज्य बिहार  (0.367) है। बिहार के तुरंत बाद असम (0.386), उत्तरप्रदेश (0.388) और मध्यप्रदेश (0.394) का नंबर है।**

• भारत में गरीबों की संख्या (हेडकाऊंट रेशियो-एचसीआर) साल 2004-05 की तुलना में 2009-10 में 7.3 फीसदी घटी है। साल 2004-05 में गरीबों की संख्या 37.2%  थी जो साल 2009-10 में घटकर 29.8% फीसदी हो गई। ग्रामीण इलाकों में गरीबों की संख्या 8.0 फीसदी कम हुई है(41.8% से घटकर 33.8%) और शहरी इलाके में 4.8 फीसदी(25.7% से घटकर 20.9%)।.  ***

• ग्रामीण इलाको में, अनुसूचित जनजातियों में गरीब व्यक्तियों की तादाद सबसे ज्यादा (47.4%) है, इसके बाद अनुसूचित जाति (42.3%) और अन्य पिछड़ा वर्ग(31.9%) में गरीबों की संख्या क्रमागत रुप से ज्यादा है। सभी वर्गों को एकसाथ करके देखें तो गरीबों की तादाद  का औसत 33.8% निकलकर आता है।.***

• साल 1993–94 और साल 2004–05 यानी कुल दस सालों की अवधि में खेतिहर मजदूर परिवारों की गरीबी के लिहाज से आंकडे में कोई खास परिवर्तन नजर नहीं आता। ग्रामीण गरीब परिवारों में ऐसे परिवारों की संख्या 41% फीसदी पर स्थिर है।***

• यूएनडीपी द्वारा प्रस्तुत मानव विकास रिपोर्ट 2019 :

 ह्ममन डेवलपमेंट रिपोर्ट  2015 , यूएनडीपी
** नेशनल ह्यूमन डेवलपमेंट रिपोर्ट  (2001), योजना आयोग, भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत
***मार्च 2012 में योजना आयोग द्वारा जारी गरीबी संबंधी आकलन(2009-10) से संबंधित प्रेसनोट
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