कश्मीर में मीडिया और इंटरनेट पर लगाए गए प्रतिबंधों से भारत की प्रेस स्वतंत्रता रैंकिंग गिरी, हालांकि स्कोर में हुआ सुधार

कश्मीर में मीडिया और इंटरनेट पर लगाए गए प्रतिबंधों से भारत की प्रेस स्वतंत्रता रैंकिंग गिरी, हालांकि स्कोर में हुआ सुधार

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published Published on May 14, 2020   modified Modified on May 14, 2020

हाल ही में रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (रिपोर्टर्स सेन्स फ्रंटियर्स - आरएसएफ) जोकि एक मीडिया वॉचडॉग संगठन है और अभिव्यक्ति व सूचना की स्वतंत्रता के लिए काम करता है, ने एक रिपोर्ट जारी की है. यह रिपोर्ट बताती है कि भारत में साल 2018 हुई छह पत्रकारों की हत्याओं से उल्ट साल 2019 में पत्रकारों की हत्या का एक भी मामला सामने नहीं आया. तब भी यह कहना गलत होगा कि साल 2019 में देश प्रेस की पूरी तरह से स्वतंत्र थी और उसकी स्वतंत्रता का कभी उल्लंघन नहीं किया गया. 

रिपोर्ट के अनुसार, साल 2020 में जारी विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक (WPFI) में 180 देशों के बीच भारत का प्रदर्शन न केवल कश्मीर में मीडिया और इंटरनेट (तय लाइनों) पर लगाए गए प्रतिबंधों से प्रभावित हुआ है, बल्कि हिंदुत्व विचारधारा और सत्तारूढ़ राष्ट्रवादी सरकार की नीतियों का पालन करने के लिए मीडिया पर दबाव भी रहा है. ऐसे पत्रकार, जिनके लिखे से सत्ताधारी राष्ट्रवादी भगवा सरकार के समर्थक असहज महसूस करते हैं, उन पत्रकारों, विशेष रूप से महिला पत्रकारों को सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों पर ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है. जो पत्रकार अधिकारियों के आलोचक हैं, उनको तंग करने के भारतीय दंड संहिता की धारा 124A (आपराधिक मुकदमों के अलावा) लगा दी जाती है. राजद्रोह की इस धारा के तहत आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है.

पेरिस स्थित आरएसएफ की हालिया जारी रिपोर्ट के अनुसार, देश में पत्रकारों को अक्सर पुलिस हिंसा, राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए अदृश्य हमलों और आपराधिक समूहों या भ्रष्ट स्थानीय अधिकारियों द्वारा प्रतिशोध की घटनाओं का सामना करना पड़ता है.

परिणामस्वरूप, देश की डब्ल्यूपीएफआई रैंकिंग (विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक) इस वर्ष दो स्थान गिरकर 142 वें स्थान पर आ गई है. 180 देशों में से, भारत 45.67 के स्कोर के साथ पिछले साल 140 वें स्थान पर था और साल 2018 में, विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक के संदर्भ में 43.24 के स्कोर के साथ 138 वें स्थान पर था. 

भूटान (67), नेपाल (112), श्रीलंका (127) और म्यांमार (139) जैसे दक्षिण एशियाई देश साल 2020 की डब्ल्यूपीएफआई रैंकिंग के मामले में भारत से बेहतर स्थान पर हैं. इसके उल्ट पाकिस्तान (145), बांग्लादेश (151) और चीन (177) जैसे पड़ोसी देशों की इस साल की WPFI रैंकिंग हमारे देश से ज्यादा खराब थी. अधिक जानकारी के लिए कृपया तालिका -1 देखें. 

तालिका 1: 2017-2020 के दौरान विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक रैंकिंग और विभिन्न देशों के स्कोर


स्रोत: रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स - आरएसएफ,

https://rsf.org/en/ranking/2017 ;
https://rsf.org/en/ranking/2018 ;
https://rsf.org/en/ranking/2019 ; and
https://rsf.org/en/ranking/2020

---

आरएसएफ (RSF) के प्रेस स्वतंत्रता बैरोमीटर ने पाया कि भारत में हाल के दिनों में तीन पत्रकारों को कैद किया गया था - Newsclick.in के गौतम नवलखा (14 अप्रैल, 2020 को), न्यापथा / गौरी मीडिया ट्रस्ट के डोड्डिपल्या नरसिम्हा मूर्ति (25 अक्टूबर, 2019 को) और कश्मीर नरेटर के आसिफ़ सुल्तान (24 अगस्त, 2018 को) को.

क्या 2020 में भारत का प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक वास्तव में गिर गया है?

भारत का WPFI स्कोर 2013 में 41.22 (रैंक 140), 2014 में 40.34 (रैंक 140), 2015 में 40.49 (रैंक 136), 2016 में 43.17 (रैंक 133), 2017 में 42.94 (रैंक 136), 2018 में 43.44 (रैंक 138),  2019 में 45.67 (रैंक 140) और 2020 में 45.33 (रैंक 142) था. कृपया चार्ट -1 देखें.

स्रोत: रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स - आरएसएफ,

https://rsf.org/en/ranking/2013 ;
https://rsf.org/en/ranking/2014 ;
https://rsf.org/en/ranking/2015 ;
https://rsf.org/en/ranking/2016 ;
https://rsf.org/en/ranking/2017 ;
https://rsf.org/en/ranking/2018 ;
https://rsf.org/en/ranking/2019 ; and
https://rsf.org/en/ranking/2020

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RSF की 2020 WPFI रिपोर्ट बताती है कि 2013 के WPFI के बाद से, देशों को 0 से 100 तक के स्कोर दिए जाते हैं, जिसमें '0' को सबसे अच्छा संभव स्कोर माना जाता है और '100' को सबसे खराब. एक वर्ष में एक विशेष देश के WPFI स्कोर की तुलना उसके पिछले वर्षों के स्कोर के साथ की जा सकती है.

चूंकि 2020 में भारत का WPFI स्कोर साल 2019 से (जो वांछनीय है) -0.34 अंकों से कम था, इसलिए यह स्पष्ट है कि देश ने हाल ही में बेहतर प्रदर्शन किया है. हालांकि, अन्य देशों ने भारत की तुलना में बहुत बेहतर प्रदर्शन किया है. परिणामस्वरूप, हमारी रैंकिंग (अन्य देशों के सापेक्ष) WPFI 2019 के मुकाबले WPFI 2020 में दो स्थान गिर गई है.

चूंकि भारत के नक्शे को 'लाल' रंग से भरकर रेड जोन में रखा गया है, जिसका मतलब है कि भारत की प्रेस स्वतंत्रता 'बुरी स्थिति' में है.

यह गौरतलब है कि किसी देश की WPFI रैंकिंग को उस अवधि के दौरान हुई पत्रकारों के साथ एब्यूज और हिंसा की घटनाओं के मात्रात्मक डेटा और आरएसएफ द्वारा तैयार की गई एक ऑनलाइन प्रश्नावली (जिसमें 87 प्रश्न हैं, जिसका 20 भाषाओं में अनुवाद किया गया है) पर विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाओं (जैसे मीडिया पेशेवरों, वकीलों और समाजशास्त्रियों) के आधार पर गुणात्मक विश्लेषण के साथ संकलित किया जाता है. 

RSF द्वारा तैयार की गई प्रश्नावली ऐसे मानदंड श्रेणियों पर केंद्रित है जो देश के बहुलतावाद, मीडिया स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्रता के लिए सम्मान के साथ प्रदर्शन का आकलन करती है. विशेषज्ञों के लिए ऑनलाइन प्रश्नावली में प्रत्येक प्रश्न निम्नलिखित छह संकेतकों में से एक से जुड़ा हुआ है (7 वें को छोड़कर): 1. बहुलतावाद; 2. मीडिया की स्वतंत्रता; 3. पर्यावरण और स्व-सेंसरशिप; 4. विधायी ढांचा; 5. पारदर्शिता; 6. इंफ्रास्ट्रक्चर; और 7. एब्यूज. कार्यप्रणाली के बारे में अधिक जानकारी के लिए कृपया यहाँ क्लिक करें.

References

2020 World Press Freedom Index in India, Reporters Sans Frontières, https://rsf.org/en/india   

Violations of press freedom barometer, Reporters Sans Frontières, please click here to access

Online trolling takes its toll on the country's press freedom ranking, News alert by Inclusive Media for Change dated 27 April, 2018, please click here to access

India slips in press freedom rankings; Javadekar slams report, The Hindu, 3 May, 2020, please click here to access

 

Image Courtesy: 2020 World Press Freedom Index, Reporters Sans Frontières



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