देश में इन समूहों पर लटक रही है कोरोना वायरस के खतरे की तलवार!

देश में इन समूहों पर लटक रही है कोरोना वायरस के खतरे की तलवार!

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published Published on Apr 19, 2020   modified Modified on Apr 19, 2020

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, 25 और 30 मार्च, 2020 के बीच, भारत में कुल COVID-19 मामलों की कुल संख्या दोगुनी यानी 519 से बढ़कर 1,251 हो गई है. 6 दिनों की अवधि में, COVID-19 से होने वाली मौतों की कुल संख्या 9 से 32 हो गई है. इस महामारी जैसी स्थिति में, जब कोरोनोवायरस संक्रमण देश भर में जंगल की आग की तरह तेजी से फैल रहा है, तो यह आवश्यक हो जाता है कि हम बाकी लोगों की तुलना में उन लोगों या समूहों का एक खाका तैयार करें जिनके संक्रमित होने के जोखिम अधिक हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने पुष्टि की है कि बूढ़े लोगों, और हृदय रोग, मधुमेह, पुरानी श्वसन बीमारी और कैंसर जैसी अंतर्निहित चिकित्सा समस्याओं से पीड़ित लोगों को इस गंभीर बीमारी के प्रकोप से खतरा अधिक है. डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि जो लोग अच्छी तरह से संतुलित आहार खाते हैं, उनकी मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता और संक्रामक रोगों से कम जोखिम के कारण उनके स्वस्थ होने की संभावना अधिक हैं.

संयुक्त राज्य अमेरिका के स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग के प्रमुख राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य संगठन, ‘रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी-CDC)’ द्वारा किए गए शोध के अनुसार, जिनमें COVID-19 से अधिक खतरे हैं:

* 65 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोग
* जो लोग नर्सिंग होम या लंबे समय तक स्वास्थ्य देखभाल संबंधी क्षेत्र में कार्यरत रहते हैं
* अन्य अधिक जोखिम वाली स्थितियां हैं:
- पुरानी फेफड़ों की बीमारी या मध्यम से गंभीर अस्थमा वाले लोग
- जिन लोगों को दिल की गंभीर बिमारियां हैं
- जिन लोगों का इम्यूनो कॉम्प्रोमाइज़ किया जाता है, उनमें कैंसर का इलाज शामिल है
- गंभीर मोटापे (बॉडी मास इंडेक्स [बीएमआई]> 40) या कुछ अंतर्निहित चिकित्सा स्थितियों वाले किसी भी उम्र के लोग, जैसे कि मधुमेह, गुर्दे की विफलता या यकृत रोग के जोखिम वाले लोग भी शामिल हैं

* जो औरतें गर्भवती हैं उनकी निगरानी की जानी चाहिए क्योंकि उनमें गंभीर वायरल बीमारी होने के खतरे अधिक होते हैं, हालांकि अब तक COVID-19 पर सीडीसी के डेटा में इसे बढ़ते खतरे के तौर पर चिन्हित नहीं किया है.

सीडीसी ने यह भी उल्लेख किया है कि ऐसी कई स्वास्थ्य स्थितियां हैं, जो एक व्यक्ति को इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज़ कर सकती हैं. इसमें कैंसर उपचार, धूम्रपान, बोन मैरो या अंग प्रत्यारोपण, प्रतिरोधक कमियां, खराब नियंत्रित एचआईवी या एड्स शामिल हैं, जिसमें की कॉर्टिकोस्टेरॉइड और रोग प्रतिरोधक क्षमता कम करने वाली अन्य दवाओं का लगातार इस्तेमाल भी शामिल है.

भारत में कमजोर समूहों का खाका

उपर्युक्त अध्ययनों को देखें तो कमजोर आबादी / समूहों पर ध्यान देने की जरूरत है, जिनमें बाकी लोगों की तुलना में COVID-19 के संक्रमण होने के अधिक खतरे हैं. इसके लिए हम सबसे पहले अपने समाज में वयस्क महिलाओं और पुरुषों के पोषण की स्थिति पर एक नजर डालते हैं. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (अर्थात NFHS-4) के चौथे दौर के डेटा से पता चलता है कि लगभग एक चौथाई वयस्क महिलाओं (यानी 22.9 प्रतिशत) का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई)18.5 किलोग्राम/मीटर वर्ग से नीचे है, जो स्पष्ट रूप से कम वजन का संकेत देता है (यानी पतलापन). 15-49 वर्ष की आयु के पुरुषों में से हर पांचवें  (यानी 20.2 प्रतिशत) पुरुष का बीएमआई 18.5 किलोग्राम / मीटर वर्ग से कम है.

यूनाइटेड किंगडम की सार्वजनिक वित्त पोषित नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का वजन कम है, तो संभावना है कि वह स्वस्थ, संतुलित आहार का सेवन नहीं कर रहा है, जिसकी वजह से उस व्यक्ति के शरीर में ऐसे पोषक तत्वों की कमी हो सकती है, जो शरीर के लिए अत्यंत जरूरी होते हैं. कम वजन के लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी 100 प्रतिशत मजबूत नहीं होती है, जिसकी वजह से उसे सर्दी, फ्लू या किसी अन्य संक्रमण होने की अधिक संभावनाएं रहती हैं. कम वजन वाली महिलाओं में अनियमित मासिक चक्र होता है, जोकि एक प्रजनन विकार है.

एनएफएचएस-4 के डेटा से हमें पता चलता है कि लगभग हर पांचवें वयस्क पुरुष (यानी 18.6 प्रतिशत) के साथ-साथ वयस्क महिलाओं (यानी 20.7 प्रतिशत) का बीएमआई 25.0 किलोग्राम/मीटर वर्ग से अधिक या बराबर है, जोकि अधिक वजन होने का संकेत है(यानी मोटापा).

एनएचएस के अनुसार, मोटापा कई गंभीर और संभावित मौत के मुंह में धकेलने वाली स्थितियों का कारण बन सकता है, जिसमें टाइप -2 मधुमेह, कोरोनरी हृदय रोग, स्ट्रोक, उच्च रक्तचाप (उच्च रक्तचाप), अस्थमा, कुछ प्रकार के कैंसर (जैसे स्तन कैंसर, गर्भ कैंसर और आंत्र कैंसर), यकृत रोग और गुर्दे (गुर्दे) की बीमारी शामिल हैं.

लिंगभेद के पार, 15-49 वर्ष की आयु के व्यक्तियों में पतलेपन का प्रचलन शहरी भारत की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक है. इसलिए, यह आश्चर्यजनक नहीं है कि ग्रामीण इलाकों के मुकाबले शहरी क्षेत्रों में वयस्कों में मोटापे की व्यापकता अधिक है.

NFHS-4 के आंकड़ों से पता चलता है कि 15-49 साल की उम्र की 53.0 प्रतिशत भारतीय महिलाएं एनीमिया से ग्रसित हैं. इसी आयु-समूह में लगभग 50.3 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिक हैं (यानी <11.0 ग्राम / डीएल). इसके विपरीत, लगभग एक-चौथाई वयस्क पुरुष (अर्थात 22.7 प्रतिशत) भी एनीमिक (यानी <13.0 g / dl) हैं.

एनएचएस की रिसर्च बताती है कि अन्य चीजों के अलावा, लोहे की कमी भी रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करती है. एनएचएस ने यह भी पाया है कि विटामिन बी 12 या फोलेट की कमी से एनीमिया की संभावित जटिलताओं में तंत्रिका तंत्र, अस्थायी बांझपन, हृदय की स्थिति, गर्भावस्था की जटिलताओं और जन्म दोषों जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इतना ही नहीं गंभीर एनीमिक व्यक्तियों में दिल के दौरे का खतरा भी होता है.
NFHS-4 के डेटा से पता चलता है कि 15-49 साल की उम्र में लगभग 5.8 प्रतिशत महिलाएं डायबिटिक (यानी> 140 मिलीग्राम / डीएल) हैं और उनमें से 2.8 प्रतिशत में रक्त शर्करा का स्तर बहुत अधिक है (यानी> 160 मिलीग्राम / डीएल) ). इसी तरह, देश में 7.9 प्रतिशत वयस्क पुरुष मधुमेह (यानी 140 मिलीग्राम / डीएल) और उनमें से 3.8 प्रतिशत उच्च रक्त शर्करा स्तर (यानी> 160 मिलीग्राम / डीएल) से पीड़ित हैं.

सीडीसी के अनुसार, डायबिटीज एक इंसान में कई जटिलताओं का कारण बन सकती है, जिसमें हृदय रोग और स्ट्रोक, अंधापन और आंखों की अन्य समस्याएं, गुर्दे की बीमारी, तंत्रिका क्षति, विच्छेदन, मसूड़ों की बीमारी और अवसाद शामिल हैं.

एनएफएचएस-4 के अनुसार, देश में उच्च रक्तचाप से पीड़ित वयस्क महिलाओं का समग्र अनुपात (सामान्य से थोड़ा अधिक, मध्यम और बहुत अधिक) 8.8 प्रतिशत है. इसके विपरीत, 15-49 वर्ष के आयु वर्ग के उच्च रक्तचाप से पीड़ित पुरुषों का अनुपात 13.4 प्रतिशत है.

"साइलेंट किलर" के नाम से प्रचलित उच्च रक्तचाप, हृदय को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. डब्ल्यूएचओ के अनुसार, उच्च रक्तचाप एक गंभीर चिकित्सा स्थिति है जो हृदय, मस्तिष्क, गुर्दे और अन्य बीमारियों के जोखिम को काफी बढ़ाती है.

गौरतलब है कि खराब नियंत्रित मधुमेह और उच्च रक्तचाप वाले व्यक्तियों में दूसरों की तुलना में कोविड -19 से संक्रमित होने की अधिक संभावना है.

एनएफएचएस-4 के अलावा, गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) पर डेटा के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रोफ़ाइल-2019 (एनएचपी -2019) से भी आंकड़े देखे जा सकते हैं. यह रिपोर्ट पिछले साल स्वास्थ्य मंत्रालय (MoHFW) द्वारा जारी की गई थी. कैंसर, मधुमेह, हृदय रोगों और स्ट्रोक (एनपीसीडीसीएस) की रोकथाम और नियंत्रण के राष्ट्रीय कार्यक्रम के उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर, एनसीडी क्लीनिकों में शामिल होने वाले 6.52 करोड़ रोगियों में से (1 जनवरी, 2018 और 31 दिसंबर, 2018 के बीच), 4.76 प्रतिशत लोग मधुमेह, 6.19 प्रतिशत को उच्च रक्तचाप, 1.70 प्रतिशत डायबिटीज मेलिटस और उच्च रक्तचाप दोनों, 0.30 प्रतिशत को हृदय रोग, 0.11 प्रतिशत को स्ट्रोक और 0.40 प्रतिशत को सामान्य कैंसर (मौखिक, ग्रीवा सहित स्तन कैंसर) पाया गया.

जैसा कि पहले कहा गया है, एचआईवी या एड्स के खराब नियंत्रण वाले रोगियों को इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज़ किया जाता है. स्वास्थ्य मंत्रालय (MoHFW) द्वारा इंडिया HIV अनुमान 2017 नामक एक तकनीकी रिपोर्ट से पता चलता है कि 2017 के अंत तक, देश में HIV (PLHIV) से अनुमानित 21.40 [रेंज 15.90-28.39 लाख] लाख लोग पीड़ित थे. 2017 में वयस्कों (15-49 वर्ष) के बीच एचआईवी की व्यापकता दर 0.22 प्रतिशत थी. कुल अनुमानित PLHIV से 42 प्रतिशत महिलाएं पीड़ित थी.

NHP-2019 रिपोर्ट से पता चलता है कि 2017 में देश की आबादी के लगभग 5.2 प्रतिशत (अनुमानित) लोग 65 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के थे. गौरतलब है कि 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के व्यक्तियों को कोरोनावायरस बीमारी से संक्रमित होने का अधिक जोखिम है.

धूम्रपान करने वाले और शराबियों को भी COVID -19 से संक्रमित होने के जोखिम हैं क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है. मैगनिट्युड ऑफ सबस्टांस यूज इन इंडिया 2019 नामक एक रिपोर्ट इंगित करती है कि यद्यपि 27.3 प्रतिशत पुरुष शराब का सेवन करते हैं, लेकिन महिलाओं के लिए यह आंकड़ा केवल 1.6 प्रतिशत है. शराब का सेवन करने वाले पुरुषों में से लगभग पांचवां पुरुष शराब पर निर्भर होता है, जबकि केवल सोलह में से एक महिला ही अल्कोहल का सेवन करती है.

NFHS-4 रिपोर्ट से पता चलता है कि 15-49 वर्ष आयु वर्ग के पुरुष जो धूम्रपान करते हैं (जैसे सिगरेट, बीड़ी, सिगार, पाइप और हुक्का) का अनुपात 28.0 प्रतिशत है और वयस्क महिलाओं में यह आंकड़ा 0.9 प्रतिशत है. 15-54 वर्ष आयु वर्ग के पुरुषों  का धूम्रपान का अनुपात 29.3 प्रतिशत है. इसका अर्थ है कि इस आयु वर्ग के एक-तिहाई भारतीय पुरुषों में कोविड-19 से संक्रमित होने के अधिक खतरे हैं.

गौरतलब है कि इस समाचार अलर्ट में जिन कई बीमारियों की चर्चा की गई है, उनकी व्यापकता में जिला, राज्य और क्षेत्रीय स्तर के अंतर व्याप्त हैं.

References

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Nutrition advice for adults during the COVID-19 outbreak, World Health Organisation (WHO), please click here to read more, accessed on 31 March, 2020

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Iron deficiency anaemia, National Health Service, please click here to read more, accessed on 31 March, 2020

Overview - Vitamin B12 or folate deficiency anaemia, National Health Service, please click here to read more, accessed on 31 March, 2020

 

Image Courtesy: Inclusive Media for Change/ Himanshu Joshi



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