“नोटबंदी में जुड़वा बच्चे खत्म हो गए हम आस लगाए हैं इस बंदी में हमारा यह बच्चा बच जाए"

Share this article Share this article
published Published on May 22, 2020   modified Modified on May 22, 2020

-न्यूजक्लिक, 

"हमारे चार बच्चे खत्म हो चुके हैं। नोटबंदी में जुड़वा बच्चे खत्म हो गए। हम आस लगाए हैं इस बंदी में हमारा यह बच्चा बच जाए"

ये शब्द कामगार श्यामजी उपाध्याय के हैं। श्यामजी इलाहाबाद से तीस किलोमीटर दूर फूलपुर में इलेक्ट्रिशन का काम करते हैं। लॉकडाउन में दो महीने से काम बंद है, श्याम जी के पास न खाने के पैसे हैं न ही कमरे का किराया देने के लिए। इसलिए वे आठ महीने की गर्भवती पत्नी को पैदल लेकर इलाहाबाद की ओर निकलने को मजबूर हो गए।

जौनपुर के रहने वाले श्यामजी कक्षा पांच तक पढ़ाई किये हैं। 2001 से आस-पास के जिलों में घूम-घूम कर काम करते हैं। श्यामजी ने चार महीने पहले फूलपुर में बिजली मैकेनिक का काम करना शुरू किया। घर-घर जाकर पुराने पंखे, वायरिंग और कूलर ठीक करने का काम करते हैं। दिनभर में 150 से 200 रुपये रुपये कमा लेते हैं।

श्यामजी पत्नी, संजू उपाध्याय के साथ फूलपुर में किराये के कमरे में रहते थे, जिसका किराया 1500 रुपये था। मकानमालिक की तरफ से कुछ दिनों से दो महीने का किराया चुकाने के लिए दबाव डाला जा रहा था।

गर्भवती संजू उपाध्याय बताती हैं, "रूम वाले किराए के लिए झगड़ा करते थे। खाने के लिए मर रहे हैं तो कहाँ से किराया देते? कोई देता था तो खाते थे। आठ महीने का बच्चा है पेट में, चलने पर दर्द होता है लेकिन रुकते-रुकते यहां तक आये"

श्यामजी ने बताया बंदी (लॉकडाउन) में काम बंद था। कोई घर पर काम के लिए बुलाता नहीं था। लॉकडाउन में काम न होने की वजह से उनके पास पैसे नहीं थे, इसलिए वे मकानमालिक का किराया नहीं चुका पाए।

श्यामजी बताते हैं "14 मई की शाम फूलपुर थाने से राजेश कुमार (सब इंस्पेक्टर) मकानमालिक के दबाव में कमरे पर आये और बोले कमरा खाली कर दो। इसलिए हम पत्नी के साथ अगले दिन सुबह पांच बजे कमरे का सारा सामान साइकिल पर लादकर पैदल इलाहाबाद की तरफ निकल पड़े।"

गर्भवती संजू के पार्क में चार दिन

श्यामजी जिस साइकिल से घूम-घूम कर घरों में पंखे बनाते थे उसी साइकिल पर कमरे का सारा सामान लादकर पत्नी के साथ 15 मई की सुबह फूलपुर से पैदल अपने गांव बदलापुर की तरफ निकल पड़े, लेकिन जौनपुर बार्डर से पुलिस ने लौटा दिया। रास्ते में पत्नी के पेट में दर्द और उल्टी होने लगी।

पूरी रपट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. 


गौरव गुलमोहर, https://hindi.newsclick.in/Twins-are-died-in-demonetisation-We-are-hopeful-that-this-child-of-ours-may-be-saved-in-this-lockdown


Related Articles

 

Write Comments

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Video Archives

Archives

share on Facebook
Twitter
RSS
Feedback
Read Later

Contact Form

Please enter security code
      Close