कोरोना महामारी के समय दिल्ली के पंजीकृत निर्माण मजदूरों को नहीं मिल पा रहा सरकारी योजनाओं का लाभ

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published Published on May 23, 2020   modified Modified on May 23, 2020

-गांव कनेक्शन, 

दिल्ली के इंदिरा विकास कॉलोनी में रहने वाले 32 वर्षीय प्रमोद दास लॉकडाउन की बढ़ती अवधि से चिंतित हैं। प्रमोद निर्माण के क्षेत्र में दिहाड़ी-मज़दूरी करते हैं। वह कहते हैं, "पहले तो प्रदूषण के कारण काम बंद रहा। अब कोरोना वायरस के कारण काम मिलना बंद हो गया है। हम लोग दिहाड़ी-मज़दूरी करते हैं, काम नहीं मिलेगा तो कहां से खाएंगे?" कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर विराम लगा दिया है। भारत में भी इसके संक्रमण को रोकने के लिए 25 मार्च, 2020 को केंद्र सरकार के द्वारा 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा की गयी थी, जिसे अब बढ़ाकर 17 मई तक कर दिया गया है। जिसका सबसे अधिक प्रभाव दिहाड़ी मज़दूरी करने वालों पर पड़ा है।

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी के आंकलन के अनुसार लॉकडाउन के कारण अप्रैल में 12 करोड़ से अधिक लोगों की नौकरियां चली गईं, जिसमें 75 प्रतिशत नौकरी असंगठित क्षेत्र से गई हैं। बिहार के मधेपुरा जिले के प्रमोद 15 वर्ष पहले काम की तलाश में दिल्ली आए थे। वह कहते हैं, "इतने वर्षों में कभी ऐसा नहीं हुआ कि घर से पैसा मंगवाने की जरूरत हुई हो। जब प्रदूषण के कारण काम बंद हुआ था तो नवंबर में तो घर चला गया था। होली के बाद लौटा ही था कि लॉकडाउन की घोषणा हो गई। अब यहां न तो काम है और न घर जा पा रहा हूं।" तीन बच्चों के पिता प्रमोद आगे कहते हैं, "हम यहां भूखे मर रहे हैं और परिवार बिहार में परेशान है। श्रमिक ट्रेन चली तो है लेकिन उसमें जाने के लिए कैसे पंजीकरण करवाएं, कुछ पता नहीं है। बिहार में नोडल अफसर का फ़ोन तो बंद ही रहता है। पुलिस को आधार कार्ड भी दिया था लेकिन कुछ नहीं हुआ।" वह आगे जोड़ते हैं कि लॉकडाउन में भी कोई सरकारी सहायता हम तक नहीं पहुंची। सरकारी अनाज के लिए न जाने कितनी बार मोबाइल से मैसेज कर चुके हैं, वो भी नहीं मिला आजतक।"

पूरी रपट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.


आसिफ इकबाल, https://www.gaonconnection.com/coronafootprint/delhi-construction-workers-are-not-getting-government-plans-benfit-during-corona-covid-19-lockdown-47599


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