MSP की लड़ाई में न फंसे- भारत को WTO कानूनों में मौजूद असमानता को दूर करने का प्रयास करना होगा

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published Published on Dec 16, 2020   modified Modified on Dec 16, 2020

-द प्रिंट,

क्या भारत विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के तहत अपने कानूनी दायित्वों का उल्लंघन किए बिना अपने किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की वैध गारंटी दे सकता है? क्या हैं समर्थन मूल्य और कृषि सब्सिडी से संबंधित ये कानून और भारत की प्रतिबद्धताएं क्या हैं?

अब तक, एमएसपी जैसे किसान समर्थक उपायों को लागू करने के लिए भारत एक तरफ खाद्य एवं आजीविका सुरक्षा और दूसरी तरफ डब्ल्यूटीओ कानून में ‘व्यापार विरूपणकारी’ करार दी गई नीतियों के बीच बहुत सावधानी से संतुलन बनाकर चलता रहा है. भारत डब्ल्यूटीओ का संस्थापक सदस्य है और उसने इसके तहत बहुपक्षीय कृषि समझौते (एओए) पर हस्ताक्षर कर रखे हैं, जो अन्य बातों के अलावा, कृषि क्षेत्र में सरकारों द्वारा दी जाने वाली घरेलू सब्सिडी को विनियमित करता है. कृषि सब्सिडी पर ‘नियंत्रण’ का उद्देश्य व्यापार विरूपणकारी रियायतों पर रोक लगाना है, जो घरेलू स्तर पर दिए जाने के बावजूद वैश्विक बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पर बुरा असर डालती हैं.

इस समझौते के तहत, रियायतों को उनकी व्यापार विरूपण प्रकृति के आधार पर दो श्रेणियों में बांटा गया है. पहली श्रेणी ग्रीन बॉक्स रियायतों की हैं. इस तरह की सब्सिडी मान्य है क्योंकि इनका व्यापार विरूपणकारी प्रभाव या तो नहीं है या फिर नहीं के बराबर है. विकसित देशों, विशेष रूप से अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी, इस श्रेणी के अंतर्गत आती हैं (और व्यापार वार्ताओं के दौरान संबंधित पक्षों ने इसका निर्धारण किया था). ग्रीन बॉक्स सब्सिडी की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं की गई है.

दूसरी श्रेणी एम्बर बॉक्स सब्सिडी की है, जिसे एओए के अनुच्छेद 6 के तहत परिभाषित किया गया है. इन रियायतों के व्यापार पर हानिकारक प्रभाव पड़ने की आशंका होती है और ये संबंधित बाजारों में विरूपण लाती हैं. वैश्विक मानदंडों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए उन्हें धीरे-धीरे कम करने की आवश्यकता है. विश्व व्यापार संगठन के सदस्य देश पहली बार वार्ताओं के उरुग्वे दौर (1986 से 1993) में इन प्रतिबद्धताओं पर सहमत हुए थे और इन प्रतिबद्धताओं से उत्पन्न मुद्दों पर बाद के मंत्रिस्तरीय सम्मेलनों और डब्ल्यूटीओ की समिति स्तर की बैठकों में चर्चा होती रही है.

पूरा लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. 


अमेय प्रताप सिंह, उर्वी टेम्बे, https://hindi.theprint.in/opinion/dont-get-involved-in-msp-battle-india-must-fight-for-inequality-in-wto/189047/


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