मई दिवस- मोदी सरकार ने कैसे भारत को एक भयानक संकट के बीच लाकर खड़ा कर दिया

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published Published on May 2, 2021   modified Modified on May 3, 2021

-द प्रिंट,

1 मई को प्रकाशित इस स्तंभ का शीर्षक बिल्कुल संयोग से ऐसा बन गया है. यहां शब्दों का कोई खेल करने का इरादा नहीं है. बदकिस्मती से भारत आज जिस संकट में फंस गया है उसका बयान इसी तरह किया जा सकता है. वह ऑक्सीजन से लेकर एन-95 मास्क तक और ऑक्सीमीटर से लेकर वैक्सीन तक तमाम चीजों के लिए बड़े देशों से मदद मांग रहा है. और ये सारी चीजें लेकर जब विशाल मालवाही विमान हमारी धरती पर उतरेंगे तब हमारे तमाम केंद्रीय मंत्री खुशी से ट्वीट कर रहे होंगे. अभी कुछ सप्ताह पहले तक वे इस संभावना को बड़ी नफरत से खारिज कर रहे थे कि हमारे ‘न्यू इंडिया’ को विदेशी मदद की जरूरत पड़ सकती है.

हम कोई बाजी जीतने के दावे नहीं कर रहे, ऐसा हम कर भी नहीं सकते क्योंकि हम सब एक ही नाव में सवार हैं. वास्तव में इस बात का स्वागत किया जाना चाहिए कि इस भयानक राष्ट्रीय आपदा में सरकार ने विदेश से मदद लेने का फैसला किया है.

यूरोपीय संघ और ब्रिटेन ने कहा है कि वे भारत के अनुरोध पर कार्रवाई कर रहे हैं. ब्रिटेन से सहायता इसके ‘फॉरेन, कॉमनवेल्थ एंड डेवलपमेंट ऑफिस’ (एफसीडीओ) के जरिए और अमेरिका से ‘यूएसएआईडी’ के जरिए आ रही है. मोदी सरकार के मंत्री इसे साझा मूल्यों, मैत्री, आदि की शानदार मिसाल के रूप में पेश कर रहे हैं. यह हमने अपने छोटे शहर में घर में चीनी खत्म हो जाने पर पड़ोसी के घर से कटोरी भर चीनी बेझिझक उधार लेते हुए सीखा है. आखिर, पड़ोसी को भी ऐसी जरूरत पड़ती ही थी.

हमारी आज जो हालत है वह घर में चीनी खत्म होने वाली हालत से कहीं ज्यादा बुरी है. जब इमरान खान और शी जिंपिंग भी उदारता से आपकी मदद करने को आगे आ रहे हैं तो आपको समझ लेना चाहिए कि आप अंधी गली में पहुंच गए हैं. वे जो संदेश दे रहे हैं उसे समझिए. एक हमसे यह कह रहा है कि हम जो दिखावा करते रहे हैं, दरअसल हम उतनी बड़ी ताकत नहीं हैं. दूसरा हमें संरक्षक वाली मुद्रा में यह एहसास करा रहा है कि इस क्षेत्र में हम कहां खड़े हैं. खासकर तब जबकि वह आपसी सहयोग के मुद्दे पर इस उपमहादेश के विदेश मंत्रियों की बैठक बुलाने के संदेश भी दे रहा है. सहयोग का मुद्दा वास्तव में कोविड संकट में सहायता का ही है.

अपने निकटतम पड़ोसी को, जिसे भारत अपना प्रभाव क्षेत्र बनाना चाहता है, हमारा संदेश यही है कि हमें भी मालूम है कि कोविड से लड़ने में तुम सबको हमारी मदद की जरूरत पड़ेगी. लेकिन भारत के भरोसे मत रहो, फिलहाल तो खुद उसे दुनिया से मदद की जरूरत है.

पूरा लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.


शेखर गुप्ता, https://hindi.theprint.in/opinion/national-interest/mayday-mayday-how-modi-govt-led-india-into-a-perfect-storm/214250/


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