महाराष्ट्र के डेरी किसान विरोध प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं

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published Published on Jul 30, 2020   modified Modified on Jul 31, 2020

-इंडिया टूडे,

पिछले हफ्ते स्वाभिमानी शेतकारी संघटना (एसएसएस), रैयत शेतकारी संघटना (आरएसएस) और ऑल ‌इंडिया किसान सभा समेत महाराष्ट्र के कई किसान संगठनों ने मिलकर डेरी किसानों के प्रति समर्थन जताया. पिछले एक हफ्ते से विरोध-प्रदर्शन करके किसान दूध की कीमत बढ़ाने की मांग कर रहे हैं.

यह विरोध-प्रदर्शन सतारा, सांगली और कोल्हापुर—इलाके में चीनी और डेरी का गढ़—में शुरू हुआ और उसके बाद यह फैलकर पश्चिमी महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ के इलाकों में पहुंच गया. एसएसएस के नाराज कार्यकर्ताओं ने 20 जुलाई को सोलापुर जिले के पंढारपुर में टायर जलाए और इस मंदिर नगरी में दूध के वाहनों की आवाजाही को रोकने के लिए बैरिकेड लगा दिया. कराड (सतारा) में एसएसएस कार्यकर्ताओं ने एक दूध के टैंकर को रोका और ड्राइवर पर दूध डाल दिया. कोल्हापुर में डेरी की दिग्गज कंपनी ‘गोकुल' के दूध टैंकर को तोड़फोड़ दिया गया. आंदोलनकारियों ने बीड में दो दूध टैंकरों के पहियों की हवा निकाल दी. इससे कम हिंसक विरोध-प्रदर्शन भी देखा गया—बुलढाणा और कोल्हापुर में कुछ किसानों को दूध से स्नान कराया गया और जलना में एसएसएस कार्यकर्ताओं ने मुफ्त दूध का वितरण किया.

राज्य के करीब 50 लाख डेरी किसान चार महीने पहले राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन से पहले 18 से 20 रु. प्रति लीटर दूध बेचते थे, लेकिन फिलहाल यह कीमत घटकर 10 रु. प्रति लीटर हो गई है. किसानों की मांग है कि गाय के दूध पर प्रति लीटर 10 रु., दूध पाउडर निर्यात करने के लिए प्रति किलो 30 रु. सब्सिडी दी जाए और घी, मक्खन तथा दूध पाउडर पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) हटाई जाए. इन संगठनों की यह भी मांग है कि दूध का खरीद मूल्य 5 रु. प्रति लीटर बढ़ा दिया जाए. (मजेदार बात यह है कि उपभोक्ता भैंस का दूध 57 से 60 रु. और गाय का दूध 65 से 70 रु. प्रति लीटर के हिसा से खरीद रहे हैं, यानी पहले जितनी कीमत ही चुका रहे हैं)

पूरी रपट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. 


किरण डी तारे, https://aajtak.intoday.in/story/why-dairy-farmers-are-protesting-in-maharashtra-1-1215059.html


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